Monday, January 27, 2014

देश की तरह RCM भी कुछ लीडरों के चंगुल में फंस गया

देश की तरह RCM भी कुछ लीडरों के चंगुल में फंस गया


अजय राणा। आज 26 जनवरी है. हर तरफ देशभक्ति के गीत गूँज़ रहे हैं. आज फिर मुझे जयपुर धरने की याद आ गई. वहाँ भी देशभक्ति के गीत बजते रहते थे. हमें लगता था कि हम आज़ादी की जँग लड़ रहे हैं. हमें गर्व का एहसास होता था.
लंबी लड़ाई के बाद आज़ादी तो मिली लेकिन देश की तरह RCM भी कुछ लीडरों के अधीन हो गया. आंदोलनकारियों की भूमिका का अंत हो गया. देश भक्त क्राँतिकारियों को आजतक याद किया जाता है लेकिन RCM के क्राँतिकारियों को तो कोई याद भी नहीं करना चाहता. वे आज किस हाल में किस मानसिकता के साथ जी रहे हैं. किसको परवाह है ?
क़ुर्बानी की कोई क़ीमत नहीं होती लेकिन क़द्र तो होनी चाहिये. उनका तो जिक्र भी नहीं होता.
अगर टीसी जी अपने किसी संदेश में उनका जिक्र कर देते तो ये भी अच्छे संस्कार का सबूत होता.
अगर टीसी जी एक बार भी कह देते कि आंदोलनकारियों का भविष्य में मान-सम्मान किया जायेगा तो हज़ारों आंदोलनकारियों के तन मन में जोशो-जुनून पैदा हो जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस कारण काफ़ी आंदोलनकारियों का गर्व चूर चूर हो गया.
आंदोलनकारियों के महत्व को ख़तम करने के लिये कुछ बड़े लीडरों ने टीसी जी को ग़लत जानकारियाँ दी और आंदोलनकारियों का अक़्स ख़राब कर दिया.
आंदोलनकारियों ने बहुत अच्छा किया लेकिन उनके साथ अच्छा नहीं हुआ…

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